मुन्ना अन्सारी सम्पादक एम आर जे न्यूज महराजगंज
दिल्ली।यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) द्वारा 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026’ के नियम 3(C) को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता मृत्युंजय तिवारी ने अपनी याचिका में कहा है कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह जाति-आधारित भेदभाव को केवल अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और ओबीसी (OBC) के खिलाफ हुए भेदभाव तक सीमित करता है, जिससे सामान्य वर्ग के लोगों को जातिगत भेदभाव शिकायत का अधिकार नहीं मिलता
यूजीसी का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान और विकलांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करना है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह नियम सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देता है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में मांग की गई है कि नियम 3(C) को असंवैधानिक घोषित किया जाए और इसके लागू करने पर रोक लगाई जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह नियम संविधान के मूल ढांचे, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है।
Delhi News: यूजीसी के नए नियमों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, जाति-आधारित भेदभाव पर बड़ा विवाद
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News Desk
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