राहुल तिवारी जिला ब्यूरो एम आर जे न्यूज सिंगरौली मध्यप्रदेश
सिंगरौली । मध्य प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा करती है, लेकिन सिंगरौली जिले की चितरंगी जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत शेरवा के कारनामे इस दावे की धज्जियां उड़ा रहे हैं। ‘पंचायत दर्पण’ पोर्टल पर अपलोड एक सरकारी दस्तावेज (कैशमेमो) ने इस पंचायत में चल रहे अंधेरगर्दी के खेल को बेनकाब कर दिया है।
महज 40 से 45 हजार रुपये के सामान को कागजों पर 99,300 रुपये की भारी-भरकम राशि में तब्दील कर सरकारी बजट को ठिकाने लगा दिया गया।
*एक ही सामान को ‘डबल’ दिखाने का खेल-*
वायरल हो रहे ‘मैसर्स जायसवाल फर्नीचर एवं मोबाइल हाउस’ के बिल नंबर 223 को देखकर किसी भी आम नागरिक का माथा ठनक जाएगा।
राशि को जबरन ₹99,300 तक पहुंचाने के लिए एक ही सामान को रिकॉर्ड में डबल (दो बार) दर्शाने और मात्रा बढ़ाने का शातिर खेल खेला गया है:आलमारी की डबल एंट्री: बिल में क्रमांक 1 पर ‘ऑफिस आलमारी’ दिखाई गई है, जिसकी मात्रा 02 नग लिखकर सीधे ₹24,000 का चूना लगाया गया है।राउंडिंग (राइटिंग) कुर्सी भी डबल: बिल के क्रमांक 7 पर ‘राइटिंग कुर्सी उच्च कुशल’ दर्ज है।
इसकी मात्रा भी 03 नग दिखाकर सीधे ₹21,000 की भारी-भरकम राशि जोड़ दी गई, जबकि धरातल पर इतनी कुर्सियों का अता-पता नहीं है।काउंटर की बढ़ाई मात्रा: कार्यालय के लिए ‘काउंटर 2.5×5’ की मात्रा भी 03 नग दिखाई गई है, जिसका बिल ₹19,500 पास कराया गया है। एक छोटी सी पंचायत में 3-3 काउंटर की क्या जरूरत थी, यह समझ से परे है।लूट का ‘मग’ और ‘बाल्टी’: जो प्लास्टिक मग बाजार में ₹20 से ₹30 में मिल जाता है, उसे पंचायत के नुमाइंदों ने ₹200 प्रति नग के हिसाब से खरीदा! यानी 6 प्लास्टिक मग का बिल ₹1,200 बनाया गया। यही नहीं, ₹50-₹60 की बाल्टी को भी ₹200 प्रति नग की दर से खरीदा दर्शाया गया।फर्नीचर की दुकान से ‘तार’ और ‘फोटो’: गबन की जल्दबाजी ऐसी थी कि फर्नीचर और मोबाइल की इस दुकान से ₹2,600 का बिजली का तार और ₹1,500 की महापुरुषों की फोटो का बिल भी इसी में घुसाकर पास करा लिया गया।
सरपंच-सचिव की सील से ‘फर्जीवाड़े’ को कानूनी जामा
इस भारी-भरकम बिल पर ग्राम पंचायत शेरवा के सरपंच और सचिव की बकायदा हस्ताक्षरयुक्त सील लगी हुई है।
यानी जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे इस बंदरबांट को बकायदा हरी झंडी दी गई।
सबसे बड़ा वित्तीय अपराध यह है कि बिल के सबसे नीचे हाथ से सीधे एक पर्सनल बैंक अकाउंट नंबर (A/c- 38210590351, SBI चितरंगी, IFSC- SBIN0014509) लिखकर सरकारी राशि ट्रांसफर करा ली गई।
नियमतः भुगतान वेंडर के आधिकारिक करंट या फर्म अकाउंट में होना चाहिए, लेकिन यहाँ खेल कुछ और ही था।
बच्चे के खाते में भेजे गए स्टेशनरी के ₹16,800-
यह फर्नीचर घोटाला तो सिर्फ बानगी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि इसके समानांतर ही स्टेशनरी खरीदी के नाम पर ‘प्रियांशी ऑनलाइन’ नामक फर्म का पूरी तरह से फर्जी बिल तैयार किया गया।
इस सामग्री की ₹16,800 की राशि किसी वेंडर को देने के बजाय सचिव ने चालाकी से अपने ही बच्चे के बैंक खाते में ट्रांसफर की और बाद में उसे नकद आहरित (विड्रॉ) कर लिया।
जनता के तीखे सवाल:-
सोते रहे जनपद के जिम्मेदार?इस खुलासे के बाद चितरंगी जनपद पंचायत के तकनीकी अधिकारियों, सब-इंजीनियर (उपयंत्री) और सीईओ (CEO) की कार्यप्रणाली भी कटघरे में है।
क्या पंचायत दर्पण पोर्टल पर बिल अपलोड होने के बाद किसी भी अधिकारी ने भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करना जरूरी नहीं समझा?
एक ही सामान को दो बार दर्ज करने, ₹30 का मग ₹200 में और ₹3,000 की कुर्सी ₹7,000 में पास कैसे हो गई?
क्या ऊपर तक हिस्सा पहुंच रहा था?सरकारी गाइडलाइन को ठेंगा दिखाकर निजी खातों में इतनी बड़ी रकम कैसे ट्रांसफर होने दी गई?
ग्रामीणों की मांग:-
शेरवा पंचायत के इस ऑन-रिकॉर्ड भ्रष्टाचार ने साफ कर दिया है कि यहाँ विकास के नाम पर सिर्फ मलाई काटी जा रही है।
स्थानीय ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि मामले की जांच कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि इस ‘डबल बिलिंग और मग-बाल्टी’ गैंग के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कर इन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाए।















