मन की चंचलता दूर किए बिना आत्मशुद्धि संभव नहीं : मुनिश्री संवेगरत्न सागर

Ramesh Pandey
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रायपुर। विवेकानंद नगर स्थित श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में 28 जुलाई से सर्व मंगलमय वर्षावास-2026 चातुर्मासिक प्रवचनमाला का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर परम पूज्य मुनि श्री संवेगरत्न सागरजी म.सा. ने कहा कि आत्मा की शुद्धि के लिए सबसे पहले जीवन का लक्ष्य तय करना आवश्यक है। जब तक मन निर्मल और केंद्रित नहीं होगा, तब तक धर्म का वास्तविक लाभ नहीं मिल सकता।

मुनिश्री ने कहा कि आज मन चंचल और भटकाव से भरा हुआ है। वर्षावास और जिनवाणी का उद्देश्य इसी चंचलता को दूर कर मन को धर्म से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि केवल शरीर और वाणी को वर्षावास में बैठा देने से कुछ नहीं होगा, जब तक मन भी धर्म में नहीं लगेगा।

मुनिश्री ने कहा कि धर्म का पालन पूरे समर्पण के साथ होना चाहिए। जैसे प्रकृति में समय-समय पर परिवर्तन होता है, वैसे ही मन और जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाना आवश्यक है। हमारा अंतिम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति है और इसके लिए मन को निर्मल व एकाग्र बनाना होगा।

मुनिश्री ने कहा कि आत्मशुद्धि के लिए लक्ष्य निर्धारित कर उसे प्राप्त करने का पुरुषार्थ करना चाहिए। बाहर का वातावरण अक्सर व्यक्ति को उसके लक्ष्य से भटका देता है। यही मन संसार में भटकने का कारण बनता है और यही मन मुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त करता है। इसलिए मन को सही दिशा देना ही सच्चा पुरुषार्थ है। 

मुनिश्री शाश्वतरत्न सागर जी म.सा. ने कहा कि केवल धर्म की ओर मुख करने से धर्म हमारे जीवन में,आचरण में प्रवेश नहीं हो सकता। हम इतने वर्षों में भी नहीं बदले। हमारे स्वभाव में परिवर्तन नहीं आया है, हमारे जीवन में अभी तक अध्यात्म नहीं आया है,इसके लिए चिंतन आवश्यक है। जैसे एक कुशल शिल्पी एक पत्थर को अपने शरण में लेकर उसे तरासता है और पत्थर प्रतिमा के रूप में बदल जाता है। ऐसे ही हमारी आत्मा परमात्मा तब बनेगी जब इसे कोई शरण में लेगा। हमें देव,गुरु और धर्म की शरण में जाना होगा। सबसे पहले आत्मा को परमात्मा बनाना है तो देव,गुरु  रुपी शिल्पी के शरण में जाना होगा। आज तक हमने दूसरों को जाना,हमने स्वयं को नहीं जाना और स्वयं नियमों को नहीं अपनाया। हमें अपनी आत्मा को समझना है और धर्म से नाता जोड़ना है। धर्म को अपने आचरण में लाना है और अपने आचरण में लाकर अपने स्वभाव को बदलने का पुरूषार्थ करना होगा। प्रतिदिन प्रभु की वाणी सुनकर अपने जीवन में परिवर्तन लाना है।

चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लूणीया व महासचिव सुरेश बरड़िया ने कहा कि 28 जुलाई चातुर्मासिक चौदस से सर्वमंगलमय वर्षावास का शुभारंभ हो गया है। प्रतिदिन ज्ञान की गंगा बहेगी। इसके साथ ही तप,त्याग और भक्ति का संगम होगा। प्रतिदिन सुबह 8:45 बजे से श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय, विवेकानंद नगर में नियमित प्रवचन होंगे। यह आयोजन श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक समाज एवं चातुर्मास समिति (अंतर्गत श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट, रायपुर) द्वारा विवेकानंद नगर में आयोजित किया जा रहा है।

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Ramesh Pandey

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मेरा नाम रमेश पाण्डेय है। पत्रकारिता मेरा मिशन भी है और प्रोफेशन भी। सत्य और तथ्य पर आधारित सही खबरें आप तक पहुंचाना मेरा कर्तव्य है। आप हमारी खबरों को पढ़ें और सुझाव भी दें।

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