राहुल तिवारी जिला ब्यूरो एम आर जे न्यूज सिंगरौली मध्यप्रदेश
सिंगरौली (मध्यप्रदेश), चितरंगी। शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला चितरंगी विकासखंड के शासकीय माध्यमिक विद्यालय देवगांव से सामने आया है। यहां विद्यालय में किचन शेड नहीं होने के कारण कड़कड़ाती बरसात के बीच भी बच्चों का मध्याह्न भोजन खुले आसमान के नीचे महुआ के पेड़ की छांव में पकाया जा रहा है। शासन द्वारा गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए जाने के बावजूद आज भी भोजन लकड़ी के चूल्हे पर बनाया जा रहा है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, विद्यालय में रसोईघर के अभाव में रसोई सहायिकाओं को बारिश के दौरान भी भीगते हुए बाहर चूल्हा जलाकर भोजन तैयार करना पड़ता है। शिक्षकों का कहना है कि कक्षाओं के भीतर चूल्हा जलाने से धुएं के कारण कमरे काले हो जाते हैं और पढ़ाई प्रभावित होती है। ऐसे में सबसे अधिक परेशानी रसोई सहायिकाओं को झेलनी पड़ रही है, जो प्रतिकूल मौसम में भी खुले में भोजन बनाने को मजबूर हैं।
मेन्यू में भी भेदभाव के आरोप
ग्रामीणों ने विद्यालय परिसर में भोजन वितरण को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि परिसर में संचालित आंगनवाड़ी केंद्र के बच्चों के लिए पूड़ी जैसे पौष्टिक व्यंजन बनाए जाते हैं, जबकि प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय के बच्चों को केवल दाल, चावल और साधारण सब्जी परोसी जाती है। भोजन की गुणवत्ता और मेन्यू को लेकर बच्चों व अभिभावकों में भी नाराजगी है।
गैस सिलेंडर धूल खा रहे, लकड़ी के चूल्हे पर निर्भर व्यवस्था
शासन की ओर से मध्याह्न भोजन समूहों को गैस कनेक्शन और सिलेंडर उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि धुआं रहित और सुरक्षित भोजन तैयार हो सके। लेकिन देवगांव में गैस सिलेंडर उपयोग में नहीं लाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि रिफिल की लागत से बचने या लापरवाही के चलते आज भी गीली लकड़ियों पर चूल्हा जलाया जा रहा है, जिससे पूरे विद्यालय परिसर में धुआं फैलता है और बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है।
अब सवाल यह है कि ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) और महिला एवं बाल विकास विभाग इस गंभीर लापरवाही पर कब संज्ञान लेते हैं और आखिर कब तक मासूम बच्चों को सुरक्षित रसोईघर और गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन की सुविधा मिल पाएगी। विद्यालय की यह तस्वीर सरकारी योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन की हकीकत बयां कर रही है।













