अम्बरीष शर्मा राज्य ब्यूरो एम आर जे न्यूज महराजगंज
महराजगंज।आपको बता दें कि महराजगंज जनपद के नौतनवा कस्टम विभाग की कार्रवाई को लेकर एक व्यापारी की शिकायत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यापारी का दावा है कि 19 सितंबर की रात कस्टम अधिकारियों ने जिस ट्रक को पकड़ा था, उसमें कस्टम विभाग द्वारा नीलाम कराया गया प्लास्टिक कबाड़ था। अधिकारियों द्वारा ट्रक को उसके डंपिंग ग्राउंड तक ले जाकर माल उतरवाया गया। इसके बाद व्यापारी ने मामले को रफा-दफा करने के लिए डेढ़ लाख रुपये मांगे जाने का आरोप लगाया। रकम नहीं दे पाने पर अगले दिन डंपिंग ग्राउंड में बोरे में रखे प्लास्टिक स्क्रैप को दोबारा ट्रक में लोड कराया गया। इस दौरान माल लोड किए जाने का वीडियो भी सामने आया है। वहीं कस्टम अधिकारियों का कहना है कि ट्रक में पहले से प्लास्टिक स्क्रैप मौजूद था, जो नेपाल से लाया गया था और कार्रवाई के दौरान कस्टम द्वारा नीलाम कराया गया कुछ माल अलग से उतरवाया गया था। दोनों पक्षों के दावों में अंतर ने पूरी कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नौतनवा निवासी कबाड़ कारोबारी महेश कुमार शर्मा ने मुख्यमंत्री सीएम योगी समेत वरिष्ठ अधिकारियों को भेजे शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि 19 सितंबर की रात करीब नौ बजे एक कंटेनर ट्रक नौतनवा बाईपास स्थित गुरुद्वारे के पास से काटा कराने जा रहा था। इसी दौरान कस्टम अधिकारियों ने ट्रक को रोक लिया और उसे उनके कुन्सेरवा बाईपास स्थित डंपिंग ग्राउंड पर ले गए।
व्यापारी के अनुसार ट्रक में रखा प्लास्टिक कबाड़ कस्टम विभाग से नीलामी के माध्यम से खरीदा गया माल था। डंपिंग ग्राउंड पहुंचने के बाद अधिकारियों ने उस माल को उतरवा दिया। और जब ट्रक चालक अजीत सिंह ने इसका वीडियो अपने मोबाइल में बना लिया तो कस्टम अधिकारियों ने उसका मोबाइल लेकर वीडियो डिलीट कर दिया। व्यापारी का आरोप है कि इसी दौरान मामले को रफा-दफा करने के लिए उससे डेढ़ लाख रुपये की मांग की गई। व्यापारी का कहना है कि इतनी रकम तत्काल उपलब्ध नहीं थी, इसलिए उसने अगले दिन व्यवस्था करने की बात कही।
व्यापारी के मुताबिक 20 सितंबर की सुबह करीब नौ बजे कस्टम अधिकारी और उनकी टीम दोबारा डंपिंग ग्राउंड पहुंची। वहां बोरे में रखा प्लास्टिक स्क्रैप ट्रक में लोड कराया गया। व्यापारी का कहना है कि यह स्क्रैप नेपाली बोरियों में रखा था, लेकिन यह नेपाल से तस्करी कर लाया गया माल नहीं था। उसके अनुसार स्थानीय लोग साइकिल से बोरे में कबाड़ लेकर उसके पास बेचने आते हैं और वह उनसे कबाड़ खरीदता है। डंपिंग ग्राउंड में रखा यही प्लास्टिक स्क्रैप कस्टम टीम ने ट्रक में लोड कराया। वहीं कस्टम अधिकारियों का पक्ष इससे अलग है। अधिकारियों के अनुसार ट्रक में पहले से ही प्लास्टिक स्क्रैप मौजूद था, जिसे नेपाल से लाया गया था। कार्रवाई के दौरान कस्टम विभाग द्वारा नीलाम कराया गया कुछ माल भी ट्रक से उतरवाया गया था।
ऐसे में अब सवाल यह है कि ट्रक में मौजूद माल वास्तव में कहां से आया था और डंपिंग ग्राउंड से दोबारा ट्रक में लोड कराया गया स्क्रैप किस स्रोत का था। यदि व्यापारी का दावा सही है तो नीलामी के जरिए खरीदे गए माल को लेकर कस्टम की कार्रवाई का आधार क्या था? वहीं यदि कस्टम का दावा सही है तो नेपाल से लाए गए कथित स्क्रैप की जब्ती और कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज क्या कहते हैं? इतनी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद कैसे इतना भारी मात्रा में स्क्रैप बॉर्डर पर कर भारत पहुंच गया। इन सवालों का जवाब जांच में सामने आना बाकी है।
व्यापारी ने कस्टम अधिकारियों पर ट्रक छोड़ने के बदले डेढ़ लाख रुपये मांगने तथा रकम नहीं देने पर उसके साथ मारपीट और गाली-गलौज करने का भी आरोप लगाया है। व्यापारी का कहना है कि मारपीट की घटना से संबंधित साक्ष्य उसके पास सुरक्षित है। उसने आरोप लगाया कि कस्टम कार्यालय में उससे जबरन एक कागज पर हस्ताक्षर भी कराए गए। बाद में ट्रक छुड़ाने के लिए 70 हजार रुपये मांगे जाने का भी आरोप लगाया गया है।
हालांकि मामले में नौतनवा के सहायक आयुक्त कस्टम सुधीर त्यागी ने बिना जांच के ही शिकायत और आरोप को निराधार बता दिया, वहीं भाजपा नेता जितेंद्र जायसवाल के शिकायत पर उन्होंने जांच कराने की बात की। उन्होंने कहा- यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। वहीं मुख्य आयुक्त सीमा शुल्क, लखनऊ मयंक शर्मा ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने कहा कि प्रकरण की विधिवत गहन एवं विस्तृत जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
वहीं मामले भाजपा नेता जितेंद्र जायसवाल ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी व्यापारी के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने बताया कि हाल ही में बॉर्डर पर एक कस्टम कर्मी द्वारा बसों से पैसे वसूलने के वीडियो वायरल हुआ था और अब इस तरह के मामले आना बेहद अनुचित है। उन्होंने कहा कि व्यापारी के साथ अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसी कार्रवाई से उनके भाजपा सरकार की छवि प्रभावित होती है।
अब मामले में सबसे बड़ा सवाल जांच की निष्पक्षता को लेकर भी खड़ा हो रहा है। जब व्यापारी ने कार्रवाई में शामिल कस्टम अधिकारियों पर ही गंभीर आरोप लगाए हैं, तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच किस स्तर के अधिकारी से कराई जाती है। क्या विभागीय स्तर पर जांच होगी या किसी स्वतंत्र अथवा उच्चाधिकारी से पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। व्यापारी द्वारा उपलब्ध कराए गए वीडियो साक्ष्य, ट्रक में मौजूद माल का विवरण, कस्टम नीलामी से संबंधित दस्तावेज, जब्ती और कार्रवाई की रिपोर्ट समेत अन्य साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच से ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। फिलहाल उच्चाधिकारी ने विस्तृत जांच की बात कही है, अब जांच की दिशा और कार्रवाई पर सभी की नजर है।









