मुन्ना अन्सारी सम्पादक एम आर जे न्यूज महराजगंज
महराजगंज। कंफर्ट जोन छोड़ना आसान नहीं होता, खासकर तब जब बात देश की प्रतिष्ठित भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की नौकरी से इस्तीफा देकर राजनीति में आने की हो। पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के राजनीति में आने की चर्चा के बीच उनके प्रशासनिक कार्यकाल को लेकर लोगों में नई उम्मीदें दिखाई दे रही हैं।
दिव्या मित्तल अपने कार्यकाल के दौरान कई जिलों में अधिकारी के रूप में चर्चा में रही हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियों को केवल औपचारिकता के रूप में नहीं, बल्कि जनहित से जोड़कर निभाया। अब राजनीति में आने के बाद उनके सामने जनता के बीच उसी भरोसे को बनाए रखने की चुनौती होगी।
उनके कार्यकाल से जुड़ा जुलाई 2024 का एक प्रसंग भी अक्सर चर्चा में रहा है। बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में जिलाधिकारी रहते हुए वह एडीएम के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के निरीक्षण पर गई थीं। तेज धूप में एडीएम ने छांव में बैठकर बातचीत करने का आग्रह किया तो दिव्या मित्तल ने कथित तौर पर कहा था— “अरे यार, धूप ही तो है, रुको पिघल थोड़ी जाएंगे।” यह प्रसंग उनके सहज अंदाज और मौके पर मौजूद रहकर काम करने की छवि से जोड़ा जाता है।
दिव्या मित्तल के नौकरी में रहते हुए उनके काम और कार्यशैली से जुड़े कई किस्से सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच चर्चा में रहे हैं। अब राजनीति में उनकी संभावित एंट्री को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि प्रशासनिक अनुभव को वह राजनीतिक और जनप्रतिनिधि की भूमिका में किस तरह आगे ले जाएंगी।
राजनीति में अच्छे प्रशासनिक अनुभव वाले लोगों की भागीदारी को लेकर भी बहस होती रही है। समर्थकों की उम्मीद है कि यदि दिव्या मित्तल चुनावी राजनीति में आती हैं तो वह जनहित, पारदर्शिता और कामकाज को अपनी प्राथमिकता बनाए रखेंगी।
हालांकि चुनाव लड़ने, किसी राजनीतिक दल में शामिल होने या मंत्री बनने जैसी संभावनाओं को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल उनकी संभावित राजनीतिक पारी को लेकर लोगों की नजरें आगे की घोषणा पर टिकी हैं।









