नितेश वर्मा उप सम्पादक एम आर जे न्यूज महराजगंज
लखनऊ/उत्तराखंड। उत्तराखंड में कुछ सामाजिक नेता अपनी राजनीति चमकाने हेतु पहाड़ और मैदान के बीच दूरी और दरार पैदा करने का कार्य कर रहे हैं। जबकि इस प्रदेश की असली नींव समाजवादी पार्टी के संस्थापक नेता जी मुलायम सिंह यादव ने सन् 1994 में रखी थी। नेता जी ने उत्तराखंड की मूल संरचना तथा सामाजिक सौहार्द की रक्षा के उद्देश्य से कौशिक समिति का गठन किया था और क्षेत्रवाद की आशंका को देखते हुए 11 जिलों का पृथक राज्य गठन करने का प्रस्ताव रखा था। मुलायम सिंह यादव यूथ ब्रिगेड के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद यादव नें आज यहां समाजवादी पार्टी द्वारा आयोजित पीडीए सम्मेलन को संबोधित किया।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने देश को जोड़ने और सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए पीडीए पहाड़ी, देसी, अल्पसंख्यक का नया जनसरोकार मॉडल दिया है। समाजवादी पार्टी उत्तराखंड में पहाड़ी, देसी और अल्पसंख्यक समाज की आवाज बनकर सर्वसमाज को साथ लेकर प्रदेश की राजनीति को नई दिशा देगी।
श्री अरविंद यादव नें आगे कहा कि उत्तराखंड में SIDCUL की स्थापना स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देते हुए रोजगार देने के उद्देश्य से की गई थी, जिसमें 70% रोजगार उत्तराखंड के लोगों के लिए आरक्षित था। लेकिन आज भी प्रदेश का युवा रोजगार न मिलने के कारण पलायन करने को मजबूर है। युवा आज भी स्थायी और सम्मानजनक रोजगार से वंचित हैं।
किसानों कि समस्या पर श्री यादव नें कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में किसानों की हालत बेहद दयनीय है। जंगली जानवर फसलें नष्ट कर रहे हैं। वर्तमान में किन्नू की फसल तैयार है, लेकिन बंदरों के डर से किसानों को समय से पहले फसल काटनी पड़ रही है।
खाद समय पर उपलब्ध नहीं, गन्ने का भुगतान लंबित, धान की सरकारी खरीद बंद, इसके साथ ही 2020 से बाजपुर के 20 गाँवों की ज़मीन पर सेल-परचेज पर प्रतिबंध ने किसानों को आर्थिक रूप से तोड़ कर रख दिया है। बच्चों की पढ़ाई छूट रही है और किसान मजदूरी पर मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा प्रदेश कहलाने वाले उत्तराखंड में गरीबों और किसानों को सस्ती बिजली उपलब्ध नहीं है। पिछले चार वर्षों में बिजली की दरें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। स्मार्ट मीटर के नाम पर सरकार आम जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालकर घरों में अंधेरा करने की तैयारी कर चुकी है।
शिक्षा पर अरविंद नें कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों के सैकड़ों विद्यालय आज शिक्षक-विहीन हो चुके हैं। सरकार सरकारी स्कूलों को बंद कर 13 किलोमीटर के दायरे में एक स्कूल रखने की योजना बना रही है, जो बिल्कुल अव्यावहारिक है। विश्व प्रसिद्ध पंतनगर विश्वविद्यालय की हालत भी अत्यंत चिंताजनक है— कर्मचारी विश्वविद्यालय की संपत्तियाँ बेचने में लगे हैं, FCI की मशीनें बेची जा चुकी हैं और नई मशीनों की खरीद वर्षों से बंद है।
कानून से संबंधित मामलों और न्यायिक गतिविधियों के बढ़ते दायरे को देखते हुए उधम सिंह नगर (रुद्रपुर) में एक नई विश्वविद्यालय की अत्यंत आवश्यकता है। समाजवादी पार्टी की मांग है कि रुद्रपुर के कॉलेज को विकसित कर “शहीद भगत सिंह विश्वविद्यालय” के रूप में स्थापित किया जाए।
सरकार द्वारा लोहिया मार्केट को तोड़कर एक छोटा वेन्डिंग जोन बनाया गया है। समाजवादी पार्टी की यह मांग है कि इस बाजार को “डॉ. राम मनोहर लोहिया मार्केट” नाम दिया जाए, ताकि महान स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी विचारक का सम्मान बना रहे।
स्वस्थ्य व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएँ पूरी तरह चरमरा चुकी हैं। अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी है, दवाइयाँ नहीं मिल रही हैं और पहाड़ी क्षेत्रों में इलाज के अभाव में रोज़ाना लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। यह शासन की विफलता का स्पष्ट प्रमाण है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का उत्तराखंड से गहरा भावनात्मक संबंध है। उनकी ससुराल जनपद काशीपुर में है, और वे अक्सर कहते हैं कि उत्तराखंड उनके हृदय के बेहद निकट है।
अखिलेश यादव द्वारा उत्तराखंड के लिए किए गए प्रमुख योगदन में केदारनाथ आपदा (2013) में सबसे बड़ा सहयोग के साथ ही उत्तराखंड को 25 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता 500 बेस/देसी घी का बड़ा राहत भंडार। जिलाधिकारी को तत्काल राहत कार्य हेतु भेजा समाजवादी सरकार की यह मदद सबसे तेज़ और प्रभावी थी।
उत्तरकाशी में आपदा की पूर्व सूचना देने वाली साहसी महिला को 5 लाख रुपये का सम्मान पुरस्कार। सुरंग हादसे में फँसे मजदूरों को निकालने वाले रेत खनन मजदूरों को लखनऊ बुलाकर 25 लोगों को अंग-वस्त्र व 1-1 लाख रुपये का सम्मान।
बरेली–किच्छा मार्ग का निर्माण समाजवादी सरकार द्वारा सम्पन्न हुआ और इसे उत्तराखंड के लोकप्रिय नेता नारायण दत्त तिवारी के जन्मदिन पर “नारायण दत्त तिवारी मार्ग” नाम समर्पित किया गया।
इस मौके पर रवि छाबड़ा, राम सिंह, अमित कुमार, उज्ज्वल सिंह, इमरान अंसारी, पुस्पेंदर यादव, दिलशाद अहमद, मों इस्लाम, वसीम अली गुड्डू भाई, संजीव सागर, शरीफ अंसारी, जितेंदर यादव, पूर्व पार्षद एन ऐन अग्रवाल, मो आज़म रहीस, विनोद गौड़, लाला यादव, तेजपाल यादव, रवि सागर, कुलदीप सागर, शंकर यादव, धर्मेंद्र यादव, अमित यादव, ओमप्रकाश, चंद्र भीम सेन, विकास कुमार, मुकेश कुमार, सर्वेश मौर्य, जया ठाकुर, अमरजीत सिद्धू
आदि सैकड़ों पीडीए के लोग मौजूद रहे।
Uttrakhand News: देवभूमि में समाजवादी पार्टी का पहाड़ी देशी अल्पसंख्यक सम्मेलन संपन्न
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News Desk
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