शुभ भाव मेहमान, अशुभ भाव चोर के समान : मुनिश्री संवेगरत्न सागर

Ramesh Pandey
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रायपुर। विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में जारी सर्वमंगलमय वर्षावास में मंगलवार को भगवान नेमिनाथ के दीक्षा कल्याणक दिवस के अवसर पर विशेष प्रवचनमाला हुई। परम पूज्य मुनिश्री संवेगरत्न सागर जी म.सा. ने धर्मसभा में भगवान नेमिनाथ के जीवन और उनके संदेशों के माध्यम से जीव दया,अहिंसा और करुणा का महत्व बताया।

मुनिश्री ने कहा कि जीव हिंसा से जीवन में सावधान रहना चाहिए। नासमझी में भी किया गया जीव हिंसा का कार्य व्यक्ति को इसी भव में भुगतना पड़ता है। जीव दया का बोध प्राप्त करने से दुख, दुर्गति और पीड़ा से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। 

मुनिश्री ने कहा कि भगवान नेमिनाथ ने अपने जीवन के माध्यम से प्रत्येक जीव के प्रति संवेदना और दया का भाव रखने की प्रेरणा दी। संसार के सभी जीवों के प्रति करुणा रखना और किसी भी प्राणी को कष्ट नहीं पहुंचाना उनके जीवन का महत्वपूर्ण संदेश रहा है।

मुनिश्री ने कहा कि शुभ भाव मेहमान के समान होते हैं, जो बुलाने पर आते हैं, जबकि अशुभ भाव चोर के समान होते हैं, जो बिना बताए आ जाते हैं। इसलिए मनुष्य को अपने भावों और विचारों पर सजग निगाह रखनी चाहिए। यदि विवेक जागृत नहीं होगा और व्यक्ति कुंठित मानसिकता में आगे बढ़ता रहेगा तो दुख की परंपरा चलती रहेगी।

मुनिश्री ने कहा कि जीवन में विवेक जागृत करना अत्यंत आवश्यक है। सही और गलत के बीच अंतर समझने की क्षमता ही मनुष्य को सही दिशा प्रदान करती है। जीवन में सुख-दुख आते-जाते रहते हैं, लेकिन विवेक जागृत होने पर व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी संतुलित रहकर सही निर्णय ले सकता है।

मुनिश्री ने कहा कि विवेक के अभाव में व्यक्ति अपनी नकारात्मक सोच और मानसिक उलझनों में फंसता चला जाता है। बाहरी परिस्थितियों को बदलने से पहले मनुष्य को अपने भीतर परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। विचारों की शुद्धता, आत्मचिंतन और सही-गलत का विवेक ही जीवन को सकारात्मक दिशा देता है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर विवेक जागृत करने का प्रयास करना चाहिए, तभी जीवन में शांति और सुख का मार्ग प्रशस्त होगा।

धर्मसभा में श्रावक-श्राविकाओं ने भगवान नेमिनाथ के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। मुनिश्री ने कहा कि जीव दया केवल धार्मिक भावना नहीं, बल्कि मानवता का मूल आधार है। प्रत्येक जीव के प्रति करुणा और संवेदना रखने से समाज में शांति और सद्भाव का वातावरण निर्मित हो सकता है।

चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लुनिया और महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि सावन सुदी अष्टमी 20 अगस्त को पार्श्वनाथ परमात्मा का मोक्ष निर्वाण कल्याण महोत्सव भक्ति भाव से मनाया जाएगा। श्री संभवनाथ जिनालय में पार्श्वनाथ परमात्मा का अभिषेक,पूजन भक्ति भाव से होगा। परमात्मा को निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा। अनुष्ठान परम पूज्य मुनिश्री संवेगरत्न सागर जी म.सा. के पावन निश्रा में होगा। 18 अगस्त से 49 दिवसीय पंच परमेष्ठी श्रेणी तप की चौथी श्रेणी प्रारंभ हो गई है। वहीं गिरनार नेमी तप की कड़ी भी जारी है। आज धर्मसभा में 16 वर्षीय तपस्वी सुश्री परी रामपुरिया के 9 उपवास पर चातुर्मास समिति ने तपस्वी का सम्मान किया। धर्मसभा में तप की खूब अनुमोदन की गई।

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Ramesh Pandey

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मेरा नाम रमेश पाण्डेय है। पत्रकारिता मेरा मिशन भी है और प्रोफेशन भी। सत्य और तथ्य पर आधारित सही खबरें आप तक पहुंचाना मेरा कर्तव्य है। आप हमारी खबरों को पढ़ें और सुझाव भी दें।

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