मुन्ना अन्सारी सम्पादक एम आर जे न्यूज महराजगंज
सिसवा बाजार, महराजगंज। भारत के महान शिक्षाविद, दार्शनिक एवं भारत रत्न से सम्मानित पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर मनाया जाने वाला शिक्षक दिवस शनिवार को सिसवा नगर पालिका क्षेत्र स्थित सेंट जोसेफ्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। समारोह में विद्यार्थियों ने विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त की।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के चेयरमैन ओ. ए. जोसेफ, प्रबंधक विन्सी जोसेफ, प्रधानाचार्य बैजू चेरियन, उपप्रधानाचार्य शिवेंद्र कुमार सिंह, इंचार्ज प्रेमसागर चौबे, टीचर सेक्रेट्री धनंजय मिश्र एवं अंग्रेजी प्रवक्ता फणींद्र कुमार मिश्र ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण करके किया। इसके बाद केक काटकर शिक्षक दिवस समारोह का विधिवत शुभारंभ हुआ।
समारोह में छात्र-छात्राओं ने मनमोहक गीत, ओजस्वी भाषण, सामाजिक एकांकी और आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया। विद्यार्थियों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
विद्यालय के चेयरमैन ओ. ए. जोसेफ ने कहा कि शिक्षक उस कुशल कुम्हार के समान होता है, जो बालमन रूपी मिट्टी को ज्ञान और संस्कारों से एक सुदृढ़ व्यक्तित्व का आकार देता है। शिक्षक स्वयं दीपक की तरह जलकर विद्यार्थियों के अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करता है। गुरुजनों का सम्मान व्यक्ति के जीवन में विनम्रता, संस्कार और परिष्कार का संचार करता है।
प्रधानाचार्य बैजू चेरियन ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य का शिल्पकार और चरित्र निर्माण का आधारस्तंभ होता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि विवेक, अनुशासन, मानवीय संवेदना और नैतिक मूल्यों से युक्त नागरिक तैयार करना है।
अंग्रेजी प्रवक्ता फणींद्र कुमार मिश्र ने गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन में भौतिक उपलब्धियां कितनी भी क्यों न हों, लेकिन जीवन जीने की वास्तविक कला और सही-गलत में अंतर करने का विवेक शिक्षक ही प्रदान करता है। शिक्षक अपने ज्ञान एवं संस्कारों से विद्यार्थी के व्यक्तित्व को ऐसी दिशा देता है, जो जीवनभर उसका मार्गदर्शन करती है।
इस अवसर पर शिवेंद्र सिंह, प्रेम सागर चौबे, धनंजय मिश्र, फणींद्र मिश्र, मुन्ना पाण्डेय, ए.बी. सर, भुवनेश्वर मिश्र, अशोक प्रजापति, नरसिंह कुशवाहा, अविरामी मिस, रमैया मिस, राजकुमार सिंह, प्रदीप रौनियार, अवनीश मिश्रा, अनिल पांडे, पीयूष त्रिपाठी, यशी सिंह, अतुल्या मिस, जीथू चेरियन, पुंडरीक गुप्ता, संतोष वर्मा, सतीश त्रिपाठी, अजीत बारीक, गंगा दुबे, सोनू भारती, अमृता पाठक, श्रीराम, मनीष श्रीवास्तव, तमजिद अली, राधेश्याम, भुवाल गुप्ता, मंशा गुप्ता, सोनू सर, मनोरमा जायसवाल, सलोनी अग्रवाल, अनूप रौनियार, रंजना त्रिपाठी, संतोष तिवारी, रवीना खातून, ओम प्रकाश वर्मा, वीरेंद्र त्रिपाठी, संजय गुप्ता, सिनसी पीटर, ललितेश गुप्ता, संजीव सर, सीजा चेरियन, रमा श्रीवास्तव, स्नेहा एवं मुकेश सहित समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
अंततः शिक्षक दिवस समारोह केवल एक औपचारिक आयोजन न रहकर गुरु के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा के सम्मान का जीवंत संदेश बन गया।
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