सूरज निकलने से पहले ही लोग कंबाइन मशीन वाले के पास पहुँच जाते हैं। हर किसी को यही जल्दी रहती है कि पहले हमारी ही फसल कट जाए।
कोई कहता है — “पूरब चलो, पहले हमारा गेहूँ काटो!”
तो कोई आवाज़ लगाता है — “अरे दक्षिण चलो,हमारी फसल तैयार खड़ी है!”
खेतों में लहराती सुनहरी बालियाँ, किसानों के चेहरों पर उम्मीद की चमक और कंबाइन मशीन की गड़गड़ाहट… यह सब मिलकर गाँव की जिंदगी का एक खूबसूरत दृश्य बना देते हैं।
यही वह मौसम होता है जब महीनों की मेहनत रंग लाती है और किसान के दिल में सुकून और खुशी उतर आती है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि हर किसान की मेहनत रंग लाए,फसलों में बरकत हो और हमारे गाँव हमेशा खुशहाल रहें।









