नितेश वर्मा उप सम्पादक एम आर जे न्यूज महराजगंज
लखनऊ । लखनऊ विश्वविद्यालय में कल (14 नवम्बर 2025) अर्थशास्त्र विभाग के एक दलित वरिष्ठ शोधार्थी को सहायक प्रोफेसर राहुल पांडे द्वारा थप्पड़ मारे जाने की घटना ने पूरे परिसर में आक्रोश पैदा कर दिया है। इस अमानवीय और शर्मनाक कृत्य के विरोध में आज संयुक्त छात्र मोर्चा के आह्वान पर छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।
छात्रों ने कहा कि यह घटना केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं है बल्कि दलित छात्रों और हाशिए पर मौजूद समुदायों के प्रति प्रशासनिक असंवेदनशीलता की गहरी अभिव्यक्ति है। पिछले कई हफ्तों से परिसर में भारी पुलिस उपस्थिति, प्रॉक्टोरियल टीम की मनमानी, और पुलिस व प्रॉक्टोरियल टीम के सदस्यों द्वारा “स्ट्रॉन्गमैन” अंदाज़ में सोशल मीडिया रीलें डालने जैसी घटनाओं ने पढ़ाई के माहौल को असुरक्षित और डरपूर्ण बना दिया है।
आज के प्रदर्शन में छात्र संगठनों ने एकजुट होकर विश्वविद्यालय प्रशासन से तुरंत कार्रवाई करने की मांग की।
संयुक्त छात्र मोर्चा की मुख्य माँगें इस प्रकार हैं:
1. दलित शोधार्थी पर हमला करने वाले सहायक प्रोफेसर राहुल पांडे का तत्काल निलंबन।
2. विश्वविद्यालय परिसर से पुलिस बल की तुरंत वापसी।
3. प्रॉक्टोरियल टीम में महिला सदस्यों की अनिवार्य और पर्याप्त संख्या में नियुक्ति।
शुभम खरवार, एनएसयूआई “एक दलित शोधार्थी को अध्यापक द्वारा थप्पड़ मारना केवल हिंसा नहीं बल्कि सामाजिक भेदभाव और सत्ता के दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण है। परिसर को पुलिस छावनी में बदलने वाली व्यवस्था अस्वीकार्य है। एनएसयूआई मांग करता है कि दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।”
महेंद्र यादव “यह घटना दिखाती है कि विश्वविद्यालय में दमन का वातावरण संस्थागत रूप से मजबूत हो रहा है। दलित छात्रों पर हमले हों या पुलिस की मनमानी, प्रशासन की चुप्पी इन्हें बढ़ावा देती है। एससीएस स्पष्ट करता है कि छात्र अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।”
वरुण आज़ाद एक दलित शोधार्थी को अध्यापक द्वारा थप्पड़ मारा जाना जातिगत शक्ति के दुरुपयोग का सीधा उदाहरण है। यह सिर्फ एक छात्र पर हमला नहीं, बल्कि दलित समुदाय की गरिमा पर प्रहार है। प्रशासन को तत्काल प्रभाव से राहुल पांडे को उनके पद से हटाना चाहिए। साथ ही प्रॉक्टोरियल टीम में महिला प्रोफेसरों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि छात्रों की सुरक्षा और सम्मान की गारंटी हो सके। भीम आर्मी स्टूडेंट फेडरेशन इस लड़ाई को एक बड़े सामाजिक न्याय के सवाल के रूप में देखता है।”
“विश्वविद्यालय में हिंसा का सामान्य होना, विशेषकर दलित और हाशिए के समुदायों के छात्रों के खिलाफ, एक बेहद खतरनाक संकेत है। अध्यापक की हिंसा, पुलिस की मनमानी और प्रॉक्टोरियल टीम की कठोरता मिलकर एक असुरक्षित माहौल बनाती है। न्याय और गरिमा की इस लड़ाई में छात्रों के साथ है।”
शान्तम निधि “लखनऊ विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक माहौल तेजी से खत्म किया जा रहा है। दलित शोधार्थी पर हमला, पुलिस की ताकत दिखाती रीलें, और प्रशासन की चुप्पी — यह सब एक दमनकारी व्यवस्था की ओर इशारा करता है। आइसा मांग करता है कि राहुल पांडे को निलंबित किया जाए, परिसर से पुलिस हटाई जाए और प्रॉक्टोरियल टीम में महिला सदस्यों की नियुक्ति तुरंत की जाए। छात्र किसी भी हालत में दमन को स्वीकार नहीं करेंगे।”
संयुक्त छात्र मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन इन मांगों पर तुरंत और ठोस कार्रवाई नहीं करता है, तो आने वाले दिनों में व्यापक छात्र आंदोलन की तैयारी की जाएगी। विश्वविद्यालय में सुरक्षित, सम्मानजनक और लोकतांत्रिक वातावरण सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
Lucknow News: दलित शोधार्थी को सहायक प्रोफेसर द्वारा थप्पड़ के खिलाफ छात्र मोर्चा ने किया जोरदार प्रदर्शन
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News Desk
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