आजादी के 76 साल बाद भी परसौली गांव सड़क से वंचित, शालिनी सिंह पटेल ने कहा “यह विकास नहीं, सिस्टम की लाचारी है
बांदा (बबेरू): आजादी के 76 साल बाद भी बांदा जिले का परसौली गांव मजरा जियालाल का डेरा ,सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है। बुधवार को यह सच्चाई तब पूरे क्षेत्र में गूंज उठी, जब सड़क दुर्घटना में मारे गए तीन लोगों के शव गांव तक नहीं पहुंच सके। गांव के अंदर जाने के लिए रास्ता इतना खराब है कि वाहन अंदर तक नहीं जा पाए। मजबूर परिजनों को करीब डेढ़ किलोमीटर दूर ही शव रोकने पड़े यह दृश्य देख हर किसी की आंखें नम हो गईं। सड़क की बदहाली ने न सिर्फ ग्रामीणों का जीवन मुश्किल बना दिया है, बल्कि शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता भी उजागर कर दी है।
जनता दल (यूनाइटेड) की प्रदेश उपाध्यक्ष एवं बुंदेलखंड प्रभारी शालिनी सिंह पटेल बुधवार को अपनी टीम के साथ मृतक परिवारों के घर पहुंचीं। गांव की हालत देखकर उन्होंने गहरा दुख जताया और कहा कि “जब आज भी किसी गांव में शव सड़क के अभाव में घर तक नहीं पहुंच पाते, तो यह सिर्फ विकास की कमी नहीं बल्कि सिस्टम की असफलता और शासन की बेरुखी का प्रमाण है।” उन्होंने कहा कि जेडीयू जनता की आवाज बनकर इस मुद्दे को जिला प्रशासन से लेकर लखनऊ और शासन स्तर तक उठाएगी। “विकास के दावे करने वालों को परसौली की सच्चाई देखकर शर्म आनी चाहिए,” — उन्होंने कहा।
गांव के लोगों ने बताया कि बरसात के दिनों में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। कीचड़ और गड्ढों से भरे रास्तों के कारण बच्चों का स्कूल जाना बंद हो जाता है, गर्भवती महिलाओं और बीमारों को अस्पताल तक पहुंचाना जानलेवा चुनौती बन जाता है। बरसों से ग्रामीण सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन विभाग और जनप्रतिनिधि सब मौन हैं। हर चुनाव में सड़क का वादा होता है, पर हकीकत में सिर्फ कीचड़ और पत्थर हैं।
शालिनी सिंह पटेल ने कहा कि जनता दल (यू) गरीबों, किसानों और महिलाओं की आवाज बनकर खड़ा है और अब यह चुप्पी नहीं चलेगी। “अब या तो सड़क बनेगी, या जवाबदेही तय होगी,” — उन्होंने दो टूक कहा। इस मौके पर उनके साथ वरिष्ठ जेडीयू जिला उपाध्यक्ष बाबूलाल चौधरी, जिला उपाध्यक्ष राजाराम राही, युवा प्रकोष्ठ जिला सचिव हरीराज पटेल और धर्मेंद्र कुमार मौजूद रहे। सभी नेताओं ने मृतकों के परिवारों को ढांढस बंधाया और पार्टी की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले परसौली गांव में हुए सड़क हादसे में रामप्रताप यादव (55), रामजस यादव (21) और सुरेश यादव (22) की मौत हो गई थी। तीनों बाइक से जा रहे थे, तभी ट्रैक्टर-ट्रॉली से टक्कर हो गई थी। हादसे के बाद से गांव में शोक की लहर है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर सड़क होती तो शायद हादसे के बाद बचाव भी जल्दी हो सकता था। यह सिर्फ एक गांव का नहीं, पूरे बुंदेलखंड के पिछड़ेपन का प्रतीक है, जहां आज भी सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं लोगों के लिए सपना बनी हुई हैं।














