जावेद अख्तर सह सम्पादक एम आर जे न्यूज महराजगंज
गरीबी से लड़कर बनीं महिलाओं की ताकत, विना ने एक सिलाई मशीन से शुरू किया सफर; 1000 बेटियों को मुफ्त सिखाया हुनर
महराजगंज।मुश्किलें जब जिंदगी के दरवाजे पर दस्तक देती हैं, तो कुछ लोग हालात के आगे घुटने टेक देते हैं, लेकिन कुछ अपने हौसले से तकदीर की तस्वीर बदल देते हैं। सिन्दुरिया की 49 वर्षीय विनीता मिश्रा ऐसी ही एक मिसाल हैं। कभी परिवार की आर्थिक तंगी और पति की गंभीर बीमारी ने उन्हें चिंता के भंवर में धकेल दिया था, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपने हुनर को हथियार बनाया। एक पुरानी सिलाई मशीन से शुरू हुआ उनका संघर्ष आज हजारों महिलाओं और बेटियों के आत्मनिर्भर बनने की कहानी बन चुका है। विना अब तक करीब 3000 महिलाओं और बेटियों को सिलाई व ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। इनमें 1000 से अधिक बेटियों को उन्होंने निःशुल्क हुनर सिखाकर अपने पैरों पर खड़े होने की राह दिखाई है।
पति की बीमारी ने बदले जिंदगी के हालात
वर्ष 2006 विना मिश्रा के जीवन का ऐसा दौर था, जिसने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। उनके पति विजय कुमार मिश्रा महाराष्ट्र में छोटे मोटे काम कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। इसी दौरान पीलिया की बीमारी से उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिवार की आमदनी का सहारा कमजोर पड़ गया। एक ओर इलाज का खर्च था, तो दूसरी ओर बच्चों के भविष्य की चिंता। घर की जिम्मेदारियां और आर्थिक तंगी लगातार चुनौती बनकर सामने खड़ी थीं। ऐसे कठिन समय में विना मिश्रा ने परिस्थितियों के आगे झुकने के बजाय खुद कुछ करने का फैसला किया। उन्होंने घर में रखी एक पुरानी सिलाई मशीन उठाई और अपने संघर्ष की नई शुरुआत कर दी।
छोटे कमरे से शुरू हुआ सफर, बना हुनर का केंद्र
शुरुआती दिनों में विनीता घर के एक छोटे से कमरे में सिलाई का काम करती थीं। सीमित संसाधन थे, लेकिन इरादे मजबूत थे। धीरे-धीरे उनके काम को पहचान मिलने लगी। सिलाई के साथ उन्होंने ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण देना भी शुरू किया। आज सिन्दुरिया के मेन चौराहे पर स्थित उनका ‘अनमोल ब्यूटी पार्लर’ केवल व्यवसाय का ठिकाना नहीं, बल्कि हुनर सीखकर आत्मनिर्भर बनने का सपना देखने वाली बेटियों के लिए उम्मीद का केंद्र बन गया है।
हजारों बेटियों को दिखाई आत्मनिर्भरता की राह
विना की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल अपने परिवार को आर्थिक मजबूती देना नहीं, बल्कि दूसरी महिलाओं और बेटियों के जीवन में बदलाव लाना है। करीब 3000 महिलाओं और बेटियों को प्रशिक्षित करने के साथ उन्होंने 1000 से अधिक बेटियों को मुफ्त प्रशिक्षण दिया। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के लिए यह मदद किसी संबल से कम नहीं है। उनके यहां प्रशिक्षण लेकर 50 से अधिक केंद्र भी खुल चुके हैं, जहां युवतियां सिलाई और ब्यूटी पार्लर का काम करके रोजगार हासिल कर रही हैं। कई महिलाएं अपने परिवार की जिम्मेदारियों में आर्थिक योगदान दे रही हैं और सम्मान के साथ जीवन जीने की राह पर आगे बढ़ रही हैं।
हुनर को बनाया बदलाव का माध्यम
विना मिश्रा की कहानी बताती है कि आत्मनिर्भरता की शुरुआत बड़े संसाधनों से नहीं, बल्कि छोटे कदम और मजबूत इच्छाशक्ति से भी हो सकती है। जिस पुरानी सिलाई मशीन ने कभी उनके परिवार को संकट से उबरने का रास्ता दिया, उसी हुनर ने हजारों बेटियों के सपनों को नई उड़ान दी। आज 49 वर्ष की उम्र में भी उनका हौसला कायम है। संघर्ष से सफलता तक का उनका सफर उस भावना को साकार करता है, जिसमें एक महिला की कामयाबी दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा बनती है। विना ने साबित किया है कि यदि हुनर को अवसर और हौसले का साथ मिल जाए, तो गरीबी की बेड़ियां तोड़कर न केवल अपनी, बल्कि हजारों जिंदगियों की दिशा बदली जा सकती है।









