नितेश वर्मा उप सम्पादक एम आर जे न्यूज महराजगंज
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों 1980 के दशक की रेट्रो तस्वीरें बनाने वाला AI ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है। Instagram, Facebook और WhatsApp पर लोग अपनी तस्वीरों को 80s के कपड़े, हेयरस्टाइल और पुराने कैमरे के लुक में बदलकर साझा कर रहे हैं। ट्रेंड की बढ़ती लोकप्रियता के बीच साइबर ठग भी सक्रिय हो गए हैं।
साइबर विशेषज्ञों और हिमाचल प्रदेश स्टेट CID साइबर क्राइम ब्यूरो की ओर से लोगों को सावधान किया गया है कि वायरल AI फोटो ट्रेंड की आड़ में फर्जी ऐप, वेबसाइट और APK फाइलों के जरिए साइबर अपराधी मोबाइल यूजर्स को निशाना बना सकते हैं।
फर्जी AI ऐप के जरिए हो सकती है ठगी
साइबर अपराधी “1980 Photo Editor”, “80s AI Photo” और “1980s Retro App” जैसे नामों से फर्जी ऐप या लिंक तैयार कर WhatsApp और Telegram के जरिए लोगों तक पहुंचा सकते हैं। इन लिंक के साथ लोगों को अपनी फोटो को 1980 के दशक की तस्वीर में बदलने का झांसा दिया जाता है।
अनजान लिंक से APK इंस्टॉल करने पर मोबाइल में मौजूद फोटो, कॉन्टैक्ट, SMS और अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच का खतरा पैदा हो सकता है।
सिर्फ डेटा नहीं, चेहरा भी जोखिम में
AI फोटो बनाने के लिए लोग अक्सर हाई-क्वालिटी चेहरे की तस्वीरें अपलोड करते हैं। यदि तस्वीर के पीछे घर का पता, वाहन की नंबर प्लेट या अन्य निजी जानकारी दिखाई दे रही हो तो उसका भी दुरुपयोग हो सकता है। ऐसी तस्वीरों का इस्तेमाल भविष्य में डीपफेक, फर्जी प्रोफाइल या पहचान के दुरुपयोग में किए जाने का खतरा रहता है।
साइबर ठगी से बचने के लिए रखें इन बातों का ध्यान
WhatsApp या Telegram से मिले 1980 AI Photo APK को डाउनलोड न करें।
अनजान वेबसाइट पर स्पष्ट चेहरे वाली तस्वीर अपलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचें।
AI फोटो ऐप यदि Contacts, SMS, Call Logs या Files जैसी गैर-जरूरी Permissions मांगे तो सतर्क हो जाएं।
किसी भी AI फोटो ऐप को OTP, UPI PIN, बैंक संबंधी जानकारी या अन्य संवेदनशील विवरण न दें।
ऐप हमेशा आधिकारिक Google Play Store या Apple App Store से ही डाउनलोड करें।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे किसी भी AI ट्रेंड को अपनाने से पहले उसके स्रोत और ऐप की विश्वसनीयता जरूर जांचें।









